अंबाला पुलिस की बड़ी कार्रवाई: जाली नियुक्ति पत्र देकर ₹60 लाख की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 3 शातिर ठग गिरफ्तार
अंबाला पुलिस की बड़ी कार्रवाई: जाली नियुक्ति पत्र देकर ₹60 लाख की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 3 शातिर ठग गिरफ्तार,
अंबाला पुलिस की बड़ी कार्रवाई: जाली नियुक्ति पत्र देकर ₹60 लाख की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 3 शातिर ठग गिरफ्तार,

सरकारी विभागों में ऊंची पहुंच का झांसा देकर युवाओं से ठगे करोड़ों रुपए।
आरोपियों से FCI, गृह मंत्रालय, रेलवे, टैक्सेशन और एक्साइज विभाग सहित 17 जाली मोहरें (Stamps) बरामद।
विभिन्न विभागों के 8 जाली नियुक्ति पत्र, 7 जाली प्लेटिनियम कार्ड और ₹2 लाख की नकदी व फर्जी सिम बरामद।
विश्वास जीतने के लिए 2-3 महीने खुद की जेब से देते थे सैलरी, लगभग 40 लोगों को बना चुके हैं शिकार।
पुलिस अधीक्षक अंबाला के कुशल निर्देशानुसार काम करते हुए अंबाला पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर मासूम युवाओं से लाखों रुपए की ठगी करने वाले एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तकनीकी संसाधनों और गुप्त सूचना तंत्र की मदद से गिरोह के तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
मुख्य आरोपी और उनकी गिरफ्तारी का विवरण,
अजय कुमार (निवासी: गांव धनौरा जाटान, थाना लाडवा, जिला कुरुक्षेत्र) – इसे 12 मई 2026 को गिरफ्तार कर 10 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया था। आरोपी के खिलाफ पहले भी दिल्ली में इसी तरह का मामला दर्ज है और वह फिलहाल जमानत पर था।
सुनील कुमार उर्फ साहिल उर्फ रोहन (निवासी: पाना चूडान, गांव बदली, जिला झज्जर) – इसे 15 मई 2026 को गिरफ्तार कर चार दिन के रिमांड के बाद जेल भेजा जा चुका है।
वारिस आलम उर्फ समीर (निवासी: गांव कन्हारिया, रामनगर, पूर्णिया, बिहार; हाल निवासी: दिल्ली) – इसे 17 मई 2026 को गिरफ्तार कर 4 दिन के रिमांड पर लिया गया था।
आरोपी अजय कुमार और वारिस आलम को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद आज दोबारा माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत (जेल) भेज दिया गया है।
मामले की विवरण,
इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत श्री सोहन लाल (निवासी: गांव बब्याल, थाना महेश नगर) अंबाला व अन्य पीड़ितों द्वारा 21 अप्रैल 2025 को थाना महेश नगर में आरोपी योगेश शर्मा व अन्य के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। आरोपियों ने सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर इन लोगों से करीब 60 लाख रुपए ठगे थे। जाँच में सामने आया है कि यह गिरोह अब तक लगभग 40 लोगों से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी कर चुका है।
ठगी का अनोखा और शातिर तरीका,
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी खुद की सरकारी विभागों में ऊंची पहुंच बताते थे। युवाओं को फंसाने के लिए वे उन्हें फर्जी जॉइनिंग लेटर (नियुक्ति पत्र) थमा देते थे। युवाओं को शक न हो, इसके लिए आरोपी उन्हें किसी भी स्थान पर 2 या 3 महीने के लिए काम पर लगा देते थे और उन महीनों की सैलरी (वेतन) खुद अपनी जेब से देते थे। इससे पीड़ित को लगता था कि उसकी नौकरी पक्की हो गई है और गिरोह की ठगी पकड़ी नहीं जाती थी।
बरामदगी का विवरण,
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और सामग्री बरामद की है,
17 जाली मोहरें (Stamps): इनमें FCI, गृह मंत्रालय, टैक्सेशन विभाग, एक्साइज विभाग, रेलवे आदि प्रमुख विभागों की जाली मोहरें शामिल हैं।
08 जाली नियुक्ति पत्र: रेलवे विभाग और राज्यसभा आदि से संबंधित।
07 जाली प्लेटिनियम कार्ड।
नकद और गैजेट्स: ₹2 लाख नगद, मोबाइल और फर्जी सिम कार्ड (जो दूसरों के नाम पर जारी कराए गए थे)।
इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में आर्थिक अपराध शाखा के निरीक्षक परमवीर सिंह के नेतृत्व में सहायक उप निरीक्षक नरेंद्र सिंह, सहायक उप निरीक्षक राजेश कुमार और उप निरीक्षक सुल्तान सिंह की टीम ने अत्यंत सराहनीय व मुस्तैदी भरी कार्रवाई की है।
निरीक्षक परमवीर सिंह का बयान,
मामले का अनुसंधान (Investigation) अभी बारीकी से जारी है। इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों को भी चिन्हित कर लिया गया है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। युवाओं से अपील है कि वे ऐसे नौकरी लगवाने वाले बिचौलियों के झांसे में न आएं।



