
किसानों पर बयान के बाद घिरे सीएम सैनी के OSD. ट्रैक्टर पर 10 हजार रुपए का साउंड सिस्टम लगवा लेते, नंबर प्लेट नहीं
किसानों पर बयान के बाद घिरे सीएम सैनी के OSD. ट्रैक्टर पर 10 हजार रुपए का साउंड सिस्टम लगवा लेते, नंबर प्लेट नहीं
किसानों पर बयान के बाद घिरे सीएम सैनी के OSD. ट्रैक्टर पर 10 हजार रुपए का साउंड सिस्टम लगवा लेते, नंबर प्लेट नहीं

झज्जर। हरियाणा में एक बार फिर किसान मुद्दे को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के ओएसडी वीरेंद्र बड़खालसा के बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
‘राष्ट्र हित पहले, किसान हित अपने आप’
वीरेंद्र बड़खालसा ने ‘किसान हितैषी’ शब्द पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी एक वर्ग विशेष के हित की बात करना संतुलित सोच नहीं है।
उन्होंने कहा,
हमें किसान हितैषी नहीं, राष्ट्र हितैषी होना चाहिए। जब राष्ट्र का हित होगा, तो किसान का हित अपने आप सुनिश्चित हो जाएगा।”
मंडी समस्याओं पर किसानों को ठहराया जिम्मेदार
मंडियों में गेट पास और टोकन को लेकर किसानों की शिकायतों पर ओएसडी का रुख सख्त नजर आया। उन्होंने इन समस्याओं को गंभीर मानने से इनकार किया और कहा कि कई बार लोग छोटी बातों को बड़ा बना देते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा,
किसान ट्रैक्टर पर 10 हजार रुपए का साउंड सिस्टम लगवा लेते हैं, लेकिन नंबर प्लेट के लिए पैसे नहीं होने का बहाना बनाते हैं। एक नंबर प्लेट के लिए झगड़ा करना गलत है।”
फोटो खिंचवाओ और फसल बेचो’—नई व्यवस्था का दावा
ओएसडी ने सरकार की नई व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि अब मंडियों में प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।
किसान अब फोटो खिंचवाकर सीधे अपनी फसल बेच सकते हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी का हक नहीं मारा जाएगा।”
‘बदलाव जरूरी, नहीं तो समाज पिछड़ जाएगा’
वीरेंद्र बड़खालसा ने समाज में बदलाव को जरूरी बताते हुए कहा कि समय के साथ बदलाव न अपनाने वाला समाज पीछे रह जाता है।
उन्होंने सभी से नई व्यवस्थाओं को अपनाने की अपील की।
किसान और बाबा साहेब के नाम पर राजनीति का आरोप
ओएसडी ने मौजूदा राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि आज सबसे ज्यादा राजनीति किसान और डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर होती है।
समाज को बांटकर देश आगे नहीं बढ़ सकता। सभी वर्गों को साथ लेकर चलना जरूरी है।”
‘सरकार नहीं चाहती कोई परेशान हो’
उन्होंने अंत में कहा कि सरकार की मंशा साफ है और वह नहीं चाहती कि कोई भी किसान या आम व्यक्ति सरकारी व्यवस्था से परेशान हो। पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
बढ़ सकती है सियासत
ओएसडी का यह बयान अब किसान संगठनों और विपक्ष के निशाने पर आ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के आसार हैं।


