सही मतदाता सूची बनाने में बी.एल.ओ. का सहयोग करें जागरूक नागरिक : अशोक कुमार मैहता

एस.आई.आर. प्रक्रिया में अपनी वोट के साथ-साथ हर जायज वोट का सत्यापन और हर गलत वोट कटवाएं : मैहता
नारायणगढ़, 23 जून :
हरियाणा के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक कुमार मैहता ने कहा कि एस.आई.आर. (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान जागरूक मतदाताओं का दायित्व केवल अपनी वोट तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सही मतदाता सूची तैयार करने में बी.एल.ओ. का सहयोग करना चाहिए, जिसमें उनकी अपनी वोट के साथ-साथ हर जायज वोट का सत्यापन और हर गलत वोट का कटना सुनिश्चित हो। हर मतदाता को इस प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
मंगलवार को यहां जारी विज्ञप्ति में अशोक मैहता ने कहा कि हमारा भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर वोट का अपना विशेष महत्व है, इसलिए मतदाता सूची केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल आधारशिला है। यदि मतदाता सूची में त्रुटियां हों, पात्र मतदाताओं के नाम छूट जाएं अथवा गलत विवरण दर्ज हों तो इसका सीधा प्रभाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर पड़ता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व बनता है कि वह अपने मतदाता विवरण की जांच कर उसे सही करवाए।
अशोक मैहता ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार चलाए जा रहे इस विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) अभियान के तहत इन दिनों बूथ लेवल अधिकारी (बी.एल.ओ.) हरियाणाभर में घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं तथा गणना प्रपत्र भरवा रहे हैं। हर नागरिक को चाहिए कि वह इस प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करे और अपने परिवार से संबंधित हर आवश्यक जानकारी सही रूप में उपलब्ध करवाए, ताकि मतदाता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि शेष न रहे।
ऐसे अभियानों में होना चाहिए बेरोजगार युवाओं का सदुपयोग : अशोक मैहता
हरियाणा के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त अशोक कुमार मैहता ने सुझाव दिया कि एस.आई.आर. जैसे अभियानों में केंद्र सरकार एवं भारतीय निर्वाचन आयोग को देश के बेरोजगार युवाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर उनका सदुपयोग करना चाहिए। इससे देश को कई प्रकार से लाभ होगा।
अशोक मैहता ने कहा कि अभी तक इस प्रकार के अभियानों का जिम्मा सरकारी स्कूलों के अध्यापकों अथवा स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग आदि के कर्मचारियों को सौंपा जाता है, जिससे अपने से ही कर्मचारियों के अभाव से जूझ रहे इन विभागों का काम प्रभावित होता है। स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ता है और कार्यालयों में कर्मचारी न मिलने से आम जनता को अपने रोजमर्रा के कामों में परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि इन कामों में बेरोजगार युवाओं को लगाया जाए तो उन्हें न केवल प्रशासनिक कार्य का अनुभव मिलेगा, बल्कि आर्थिक तौर पर लाभ मिलने से उनका मनोबल भी बढ़ेगा। इससे वे समाज में अलग-थलग पड़ कर नशों एवं अपराध में पडऩे के बजाय अपनी दोगुनी शक्ति के साथ इस अनुभव का उपयोग करके अपना अच्छा रोजगार हासिल करने का प्रयास करेंगे और उन्हें जो काम मिलेगा, उसे भी पूरी जिम्मेदारी के साथ अंजाम देंगे।


