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युवा एकजुटता मार्च शक्ति प्रदर्शन नहीं, समर्थन प्रदर्शन है : चित्रा सरवारा

युवा एकजुटता मार्च शक्ति प्रदर्शन नहीं, समर्थन प्रदर्शन है : चित्रा सरवारा

युवा एकजुटता मार्च शक्ति प्रदर्शन नहीं, समर्थन प्रदर्शन है : चित्रा सरवारा

युवा एकजुटता मार्च शक्ति प्रदर्शन नहीं, समर्थन प्रदर्शन है : चित्रा सरवारा
युवा एकजुटता मार्च शक्ति प्रदर्शन नहीं, समर्थन प्रदर्शन है : चित्रा सरवारा

आज अपने युवा का साथ देना हर भारतीय का प्राथमिक दायित्व है : चित्रा सरवारा

 

युवाओं का संघर्ष और माँगें संवैधानिक हैं, देश के हर बच्चे के भविष्य के लिए हैं : चित्रा सरवारा

 

आज युवाओं को देश की और कल देश को युवाओं की ज़रूरत है : चित्रा सरवारा

 

अंबाला की ‘युवा एकजुटता मार्च’ में उमड़ा जनसैलाब : चित्रा सरवारा

 

अंबाला छावनी :

 

देशभर में लगभग 152 प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं, बढ़ती बेरोज़गारी तथा जंतर-मंतर पर छात्रों के मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में और हमारे युवाओं के समर्थन में चित्रा सरवारा ने एक सामाजिक, सर्वपार्टी, सर्वजन ‘युवा एकजुटता मार्च’ का जन-निवेदन किया, जिसमें भारी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए।

 

चित्रा ने कहा कि ‘युवा एकजुटता मार्च’ शक्ति प्रदर्शन नहीं, समर्थन प्रदर्शन है। समर्थन जो दिखाता है कि हम युवा के साथ हैं, हम संविधान के साथ हैं, हम नैतिकता के साथ हैं… और आज यहाँ उमड़ा जनसैलाब इस साथ और समर्थन की गवाही देता है।

 

हम बेहतर भारत के साथ हैं।

 

‘अंबाला युवा के साथ’ का बैनर लेकर देशभक्ति के गीतों के साथ हाथों में मोमबत्तियाँ लिए यह मार्च अंबाला रेलवे रोड पार्किंग से शुरू होकर सदर बाज़ार से होते हुए पुरानी अनाज मंडी पहुँचा, जहाँ ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन के शब्दों के साथ साझा प्रार्थना भगवान के द्वार अर्पित की गई और फिर राष्ट्रगान के साथ मार्च का समापन हुआ।

 

शहर के प्रमुख बाज़ारों से होकर गुज़री इस यात्रा में छात्र-छात्राओं, महिलाओं, युवाओं, किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न वर्गों के बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए। हाथों में देश का तिरंगा व मोमबत्तियाँ लिए लोगों ने युवाओं के भविष्य, निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में अपनी आवाज़ बुलंद की।

 

इस अवसर पर चित्रा सरवारा ने कहा कि देश का युवा आज किसी राजनीतिक संघर्ष का नहीं, बल्कि अपने भविष्य, सम्मान और न्याय का संघर्ष लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठते रहे विवादों ने लाखों युवाओं की मेहनत, विश्वास और उम्मीदों को गहरी चोट पहुँचाई है। अनेक मामलों में जाँच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई और गिरफ्तारियाँ भी हुईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर गंभीर प्रश्न उठे हैं। उनका कहना था कि ऐसी परिस्थितियों में सरकार का दायित्व युवाओं का विश्वास बहाल करना होना चाहिए।

 

चित्रा सरवारा ने कहा कि जंतर-मंतर पर अपनी माँगों को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों के विरुद्ध हुई पुलिस कार्रवाई ने देशभर में दुख और असंतोष का वातावरण पैदा किया है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में असहमति को बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से संबोधित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज़ को दबाने का प्रत्येक प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है।

 

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में किसान आंदोलन, महिला खिलाड़ियों, सरपंचों व पंचों के आंदोलन तथा अन्य जन आंदोलनों ने भी देश को यह संदेश दिया कि जब जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए शांतिपूर्ण ढंग से सड़कों पर उतरती है, तो उसकी बात को गंभीरता से सुनना लोकतांत्रिक शासन की ज़िम्मेदारी होती है। उनके अनुसार जंतर-मंतर का घटनाक्रम भी उसी व्यापक चिंता का हिस्सा है, जिसमें युवा अपने भविष्य और अवसरों की सुरक्षा की माँग कर रहे हैं।

 

चित्रा सरवारा ने कहा कि आज आवश्यकता किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध की नहीं, बल्कि उन करोड़ों युवाओं के भविष्य की रक्षा की है, जो वर्षों तक कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि योग्य और परिश्रमी युवाओं का विश्वास व्यवस्था से उठने लगे, तो उसका प्रभाव पूरे राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक भविष्य पर पड़ता है।

 

उन्होंने कहा कि यह युवा एकजुटता यात्रा केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जागृत करने का अभियान है। उन्होंने छात्रों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, व्यापारियों तथा समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक से लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर शिक्षा, रोजगार, पारदर्शिता और जवाबदेही के पक्ष में संगठित होने का आह्वान किया।

 

चित्रा सरवारा ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार या व्यवस्था से बड़ा नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो तथा ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें मेहनत और योग्यता ही सफलता का आधार बने।

 

युवा एकजुटता यात्रा के समापन पर उपस्थित लोगों ने युवाओं के अधिकारों, निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था, शिक्षा और रोजगार के अवसरों की रक्षा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए शांतिपूर्ण जनजागरण अभियान को आगे भी जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

 

इस अवसर पर अंबाला छावनी के अनेकों धार्मिक, राजनीतिक, पार्षदों व पूर्व पार्षदों, पंचों व सरपंचों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।

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