
चंडीगढ़ में झुग्गी में रहकर 150 करोड़ की प्रॉपर्टी बनाने वाले रामलाल चौधरी की काली कमाई पर ED की चार्जशीट
चंडीगढ़ में झुग्गी में रहकर 150 करोड़ की प्रॉपर्टी बनाने वाले रामलाल चौधरी की काली कमाई पर ED की चार्जशीट
चंडीगढ़ में झुग्गी में रहकर 150 करोड़ की प्रॉपर्टी बनाने वाले रामलाल चौधरी की काली कमाई पर ED की चार्जशीट
चंडीगढ में कभी रामदरबार की झुग्गी में रहने वाला और मजदूरी कर जीवन चलाने वाला रामलाल चौधरी आज मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के शिकंजे में है। करोड़ों की अवैध कमाई के आरोपों में ED ने रामलाल चौधरी और उसके बेटे अमित कुमार के खिलाफ चंडीगढ़ जिला अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है।
ED की स्पेशल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए 6 फरवरी को पेश होने के आदेश दिए हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि जांच में रामलाल चौधरी की अवैध संपत्तियों का आंकड़ा 150 करोड़ रुपए से अधिक बताया जा रहा है।
चार साल पहले गिरफ्तारी से खुला था काला चिट्ठा
रामलाल चौधरी चार साल पहले उस समय चर्चा में आया था, जब चंडीगढ़ पुलिस ने उसे करोड़ों रुपए की ठगी के दो बड़े मामलों में गिरफ्तार किया था। इन्हीं मामलों को आधार बनाकर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की। करीब तीन साल चली जांच के बाद अब चार्जशीट दाखिल की गई है।
फाइनेंस और प्रॉपर्टी के नाम पर ठगी का जाल
ED के अनुसार, रामलाल ने खुद को बड़ा फाइनेंसर और प्रॉपर्टी डीलर बताकर कई लोगों को निवेश का झांसा दिया। गुरुग्राम के कारोबारी अतुल्य शर्मा से 5 करोड़ रुपए और रेवाड़ी के एक रिटायर्ड अधिकारी से 6 करोड़ रुपए की ठगी के आरोप उसी नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
पुलिस-नेताओं से नजदीकी बना कर बढ़ाया रुतबा
जांच एजेंसियों का दावा है कि रामलाल चौधरी ने पुलिस और राजनीतिक संपर्कों का फायदा उठाकर लोगों को प्रशासनिक मामलों में राहत दिलाने का भरोसा दिया। इसी भरोसे के दम पर वह मोटी रकम वसूलता रहा। आरोप यहां तक हैं कि पुलिसकर्मियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी उसका दखल बताया जाता रहा।
लग्जरी गाड़ियों और बेनामी संपत्तियों की जांच जारी
पुलिस कार्रवाई के दौरान रामलाल के पास से बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज जैसी महंगी लग्जरी गाड़ियां बरामद की गई थीं। ED अब उसकी चल-अचल और संभावित बेनामी संपत्तियों की गहन जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि काली कमाई को किन रास्तों से सफेद किया गया।



