लंदन से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने प्रवासी भारतीयों और अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
लंदन से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने प्रवासी भारतीयों और अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
लंदन से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने प्रवासी भारतीयों और अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
16 साल पुराना मशहूर रेस्टोरेंट अब होगा बंद

लंदन के हैमरस्मिथ इलाके में स्थित Rangrez पिछले 16 वर्षों से भारतीय स्वाद का जाना-पहचाना नाम रहा है। इस रेस्टोरेंट को भारतीय मूल के कारोबारी हरमन सिंह कपूर चला रहे थे। लेकिन अब उन्होंने इसे बंद करने का ऐलान कर दिया है।
कपूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “16 यादगार सालों के बाद मैंने हैमरस्मिथ में रंगरेज रेस्टोरेंट को अगले महीने बंद करने का कठिन फैसला लिया है।”
बंद करने की वजह क्या बताई?
हरमन सिंह कपूर ने अपने फैसले के पीछे कई कारण गिनाए
बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव
लगातार ऑनलाइन हैरेसमेंट
पाकिस्तानियों की ओर से बार-बार गड़बड़ी और हमलों के आरोप
और Metropolitan Police से पर्याप्त सहयोग न मिलने की शिकायत
उनका कहना है कि इन सब हालातों ने बिजनेस चलाना मुश्किल बना दिया।
एक्टिविज्म पर फोकस करने का ऐलान
कपूर ने साफ कहा कि अब वह बिना किसी ध्यान भटकाव के पूरी तरह एक्टिविज्म के लिए खुद को समर्पित करना चाहते हैं। उन्होंने कट्टरपंथियों को संदेश देते हुए लिखा:
“तुम मेरे बिजनेस में रुकावट डाल सकते हो, लेकिन मेरी इच्छा को नहीं। अब मैं और मजबूती से तुम्हारे खिलाफ खड़ा रहूंगा।”
साथ ही उन्होंने उन ग्राहकों का आभार जताया, जिन्होंने 16 साल तक उनके रेस्टोरेंट को समर्थन दिया।
खालिस्तान समर्थकों से टकराव
हरमन सिंह कपूर सोशल मीडिया, खासकर टिकटॉक पर काफी सक्रिय रहते हैं और कई बार खालिस्तान आंदोलन की खुलकर आलोचना कर चुके हैं। बताया जाता है कि एक बार जब उन्होंने अमृतपाल सिंह का मजाक उड़ाया, तो कथित तौर पर खालिस्तान समर्थकों ने उनके रेस्टोरेंट पर हमला किया था।
सवाल कई खड़े हो रहे हैं
क्या एक कारोबारी को अपने विचार रखने की कीमत बिजनेस बंद करके चुकानी पड़े?
क्या कानून-व्यवस्था ऐसी घटनाओं को रोकने में नाकाम रही?
और क्या ऑनलाइन नफरत अब असली जिंदगी के कारोबारों को भी प्रभावित करने लगी है?
16 साल तक लंदन में भारतीय स्वाद का प्रतिनिधित्व करने वाला “रंगरेज” अब बंद होने जा रहा है, लेकिन हरमन सिंह कपूर का कहना है कि उनकी आवाज अब और बुलंद होगी।
यह मामला सिर्फ एक रेस्टोरेंट का नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति, सुरक्षा और प्रवासी समुदायों की चुनौतियों से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
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