
बाढ़ पीड़ितों के आंसुओं में भीग गई संवेदनाएं
निर्मल सिंह और पवन अग्रवाल डिंपी बोले – “कांग्रेस हर हाल में किसानों व ग्रामीणों के साथ खड़ी है”।
अम्बाला शहर:- अम्बाला शहर विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी निर्मल सिंह ने सोमवार को अम्बाला शहर के बाढ़ प्रभावित गांव जोधपुर,जंधेड़ी और बालापुर का दौरा कर ग्रामीणों के दर्द को नज़दीक से महसूस किया। उनके साथ जिला कांग्रेस कमेटी अंबाला शहरी के अध्यक्ष पवन अग्रवाल डिंपी और कांग्रेस के अनेक कार्यकर्ता व नेता भी मौजूद रहे। तीनों गांवों व आस पास के इलाकों में भारी जलभराव और टूटी हुई घग्गर व सील नहरों की बांधों को देखकर दोनों नेताओं की आंखें भीग गईं। खेतों में खड़ी फसलें बह चुकी थीं, घरों में कीचड़ और मलबा भरा था, लोग अपने पशुओं और बच्चों को बचाने के लिए जूझ रहे थे।

चौधरी निर्मल सिंह ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की लापरवाही की भी त्रासदी है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल ने इन गांवों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। प्रशासन न तो समय पर राहत लेकर पहुंचा और न ही किसी ने इन परिवारों का हाल पूछा। उन्होंने जिला प्रशासन को तुरंत राहत शिविर लगाने, मुआवज़े की प्रक्रिया तेज करने और टूटे बांधों की मरम्मत युद्धस्तर पर करने के आदेश देने की अपील की।
पवन अग्रवाल डिंपी ने भी ग्रामीणों के दुख को अपना दुख बताते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी इन पीड़ितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ता आज गांव-गांव जाकर राहत कार्यों में जुटे हैं और पार्टी उच्च नेतृत्व तक इस आपदा की सच्ची तस्वीर पहुंचा रहे हैं। पवन अग्रवाल डिंपी ने हरियाणा सरकार से मांग की कि बर्बाद फसलों का पूरा मुआवज़ा दिया जाए, ग्रामीणों के घरों की मरम्मत के लिए विशेष पैकेज बनाया जाए और पशु हानि का भी मुआवज़ा सुनिश्चित किया जाए।
निर्मल सिंह ने याद दिलाया कि 2023 में भी जब इसी तरह की बाढ़ आई थी तब अंबाला के किसानों और ग्रामीणों को अपनी टूटी ज़िंदगी को दोबारा खड़ा करने में लंबा संघर्ष करना पड़ा था। उस समय फसलें तबाह हुईं, पशुधन मर गया और बीमारियां फैल गईं जिससे आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ग्रामीणों ने अपने दम पर फिर से जीवन पटरी पर लाया था, लेकिन इस बार फिर वही त्रासदी कुदरत ने दोहरा दी है। चौधरी निर्मल सिंह ने सरकार से मांग की कि किसानों को कम से कम 70,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवज़ा दिया जाए, ताकि वे फिर से खेती कर सकें। उन्होंने कहा कि अंबाला दूसरी बार इस आपदा का शिकार हो रहा है और लोगों को अपने पैरों पर खड़े होने में लंबा समय लग सकता है, ऐसे में सरकार को चाहिए कि पोर्टल की औपचारिकताओं से ऊपर उठकर प्रशासनिक अधिकारी खुद गांव-गांव जाकर नुक़सान का आंकलन करें और तुरंत राहत प्रदान करें।
उन्होंने चेतावनी दी कि जलभराव के कारण बीमारियां फैलने लगी हैं और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सरकार को चाहिए कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सकीय शिविर लगाए जाएं, दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और ग्रामीणों को बीमारियों से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।
निर्मल सिंह ने कहा की सरकार को तुरंत पीड़ितों के आंसू पोंछने चाहिए सरकार को चाहिए कि वह कागज़ी दावों से बाहर निकलकर अधिकारियों की ड्यूटी लगाकर वास्तविकता देखकर अम्बाला शहर क्षेत्र का दौरा करे और वास्तविक राहत कार्य सुनिश्चित करे।



