
आपदा सांझी है, निवारण भी सांझी मेहनत से ही होगा – चित्रा सरवारा
चित्रा सरवारा का राहत अभियान तेज़, बाढ़ पीड़ितों के लिए मेडिकल कैम्प।
टाँगरी किनारे पीड़ा में मदद करने उतरीं सामाजिक संगठनों की टीमें।


अम्बाला छावनी – बाढ़ के बाद टाँगरी नदी के आसपास फैली बीमारी और अव्यवस्था के बीच रविवार को एक सामूहिक प्रयास ने राहत की सांस दी। ड्रॉप्स ऑफ चेंज,इंसानियत फाउंडेशन, अवेयरनेस वेलफेयर सोसाइटी और टीम चित्रा के सहयोग से परशुराम मंदिर के निकट एक विशाल मेडिकल कैम्प लगाया गया, जिसमें अम्बाला के सुप्रसिद्ध डॉक्टरों की टीम ने निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं। कैम्प में सैकड़ों लोग पहुँचे, जिन्हें दवाइयाँ,आवश्यक जीवन उपपयोगी वस्तुएँ और भोजन वितरित किया गया।
चित्रा सरवारा ने इस अवसर पर कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में महामारी फैलने का खतरा गहराता जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से अपील करते हुए कहा की टाँगरी के साथ लगते इलाको में ई-टॉयलेट्स की सबसे ज्यादा जरूरत है अनेको महिलाओ ने चित्रा से मुलाकात कर बताया की कीचड़ ज्यादा होने की वजह से निकासी नही है जिसकी वजह से टॉयलेट्स ब्लॉक पड़े हुए है जिसकी वजह से हमें महिलाओं को मजबूरी में खुले में टॉयलेट जाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा की इस आपदा को केवल प्राकृतिक दुर्घटना न मानें, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य मिशन के रूप में देखें। चित्रा ने कहा—“यह समय राजनीति का नहीं, मानवता का है। हमें हर व्यक्ति तक दवा,भोजन और साफ़ पीने का पानी पहुँचाना होगा, वरना स्थिति और गंभीर हो सकती है।” जिस तरह युवा साथी सामाजिक संस्थाएं, डॉक्टरो और वोलन्टियर टीमें साथ आए इसके लिए चित्रा ने सभी का दिल से आभार व्यक्त करते हुए सभी अम्बाला वासियों को आगे आने की गुजारिश भी की।
उन्होंने लोगों से जागरूक रहने, साफ-सफाई बनाए रखने और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की। चित्रा सरवारा ने अपनी टीम के साथ प्रभावित परिवारों तक पहुँचकर उन्हें हौसला दिया और कहा कि यह आपदा केवल नुकसान नहीं, बल्कि समाज को एकजुट होने का अवसर भी है। उन्होंने प्रशासन से राहत शिविरों में पर्याप्त चिकित्सक, स्वच्छ जल और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की माँग की।
कार्यक्रम के दौरान भारी संख्या में टीम चित्रा के कार्यकर्ता सक्रिय दिखे। डॉक्टरों ने बुखार,चर्म रोग, डायरिया,कमर दर्द और पैरों में गलने के कारण फंगस जैसी बीमारियों के लिए उपचार दिया। बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए विशेष परामर्श सत्र आयोजित हुए। राहत सामग्री के साथ महिलाओं को सैनिटरी किट व बुजुर्गों और बच्चों को मल्टीविटामिन व पोषण पैकेट भी दिए गए।



